जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप में बड़ी खामियां, मोदी सरकार की नीयत पर सवाल : साधना भारती
कानपुर नगर, कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता साधना भारती ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर जातिगत जनगणना को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप में मूलभूत कमियां हैं और इससे साफ जाहिर होता है कि मोदी सरकार की नीयत जातिगत जनगणना को पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से कराने की नहीं है।
साधना भारती ने कहा कि कांग्रेस मौजूदा प्रश्नावली को खारिज करती है और मांग करती है कि इसे तत्काल रद्द कर तेलंगाना और बिहार की तर्ज पर प्रमाणित जातियों की ड्रॉपडाउन सूची के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही नई प्रश्नावली तैयार होनी चाहिए, ताकि देश की प्रत्येक जाति और समुदाय की वास्तविक संख्या सामने आ सके।
उन्होंने कहा कि आगामी जनगणना के अधिसूचित 40 प्रश्नों में सवाल नंबर 10 ही सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। इसमें ओपन-एंडेड विकल्प रखा गया है, जबकि जातिगत जनगणना के लिए प्रमाणित ड्रॉपडाउन सूची बेहद जरूरी है। अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में एक ही जाति अलग-अलग नामों, उपजातियों, बोलियों और वर्तनी से जानी जाती है। ऐसे में ओपन-एंडेड व्यवस्था के कारण एक ही जाति के अनेक नाम दर्ज होंगे और वास्तविक आंकड़े बुरी तरह बिखर जाएंगे।
साधना भारती ने कहा कि प्रश्नावली में “पिछड़ा वर्ग” शब्द तक शामिल नहीं है। ऐसी स्थिति में देश के ओबीसी और ईबीसी समाज की वास्तविक आबादी का सही आंकड़ा सामने कैसे आएगा? उन्होंने कहा कि गलत जातिगत आंकड़ों का सबसे बड़ा नुकसान ओबीसी, ईबीसी, दलितों और अन्य वंचित वर्गों को होगा। सही आंकड़े नहीं होंगे तो “जितनी आबादी, उतना हक” की लड़ाई कमजोर होगी और आरक्षण, शिक्षा, रोजगार, छात्रवृत्ति, कौशल विकास तथा सरकारी योजनाओं में न्यायसंगत हिस्सेदारी तय करना मुश्किल होगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश और विभिन्न राज्यों के पास जातियों की प्रमाणित सूचियां उपलब्ध हैं, तो जातिगत जनगणना में ड्रॉपडाउन सूची क्यों नहीं शामिल की जा रही है? उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी के अनुसार 1 जून की बैठक में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पास उपलब्ध ओबीसी जातियों की सूची साझा करने की बात सामने आई थी। फिर इस सूची को प्रक्रिया में शामिल क्यों नहीं किया गया? आखिर किसके निर्देश पर पिछड़े वर्गों की प्रमाणित सूची को जातिगत जनगणना से बाहर रखा गया?
साधना भारती ने कहा कि केंद्र सरकार ने 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में स्वयं माना था कि जातिगत जनगणना के लिए पहले से जातियों की ड्रॉपडाउन सूची तैयार होना आवश्यक है। इसके बावजूद अब सरकार उसी आवश्यक व्यवस्था से पीछे हट रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस वर्ष 2021 से जातिगत जनगणना की मांग करती रही है और राहुल गांधी वर्ष 2023 से लगातार इस मुद्दे को मजबूती से उठा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने कहा कि लंबे जनदबाव के बाद सरकार को जातिगत जनगणना कराने की घोषणा करनी पड़ी, लेकिन अब उसकी प्रक्रिया को ही कमजोर किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अभी भी सरकार के पास प्रारूप में जरूरी सुधार करने का समय है। कांग्रेस स्पष्ट करना चाहती है कि पिछड़ों, दलितों और शोषितों के अधिकारों की लड़ाई से कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी। सरकार को हर हाल में पारदर्शी, वैज्ञानिक और प्रमाणित जातिगत जनगणना करानी होगी।
टूटी सड़कों और भ्रष्टाचार पर भी भाजपा सरकार को घेरा
प्रेस वार्ता में साधना भारती ने कानपुर की बदहाल सड़कों और नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर भी भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कानपुर की टूटी सड़कें और गड्ढे विकास के दावों की पोल खोल रहे हैं। नगर निगम में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक संवेदनहीनता के कारण जनता परेशान है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की डबल इंजन सरकार भ्रष्टाचार के मामले में सबसे आगे है और जनता को विकास के नाम पर सिर्फ खोखले दावे दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता के मुद्दों पर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करती रहेगी।
प्रेस वार्ता में कानपुर महानगर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पवन गुप्ता, प्रतिभा अटल पाल, शंकर दत्त मिश्रा, पदम मिश्रा, राकेश साहू, डॉ संतोष त्रिपाठी, शीलू श्रीवास्तव, अमिताभ दत्त मिश्रा ,विनोद अवस्थी, रामनवल कुशवाहा, शिव शंकरसोशल मीडिया ,मणि तिवारी, रामदेव पाल , राजेश भारतीसहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे।




