सनातन के सभी जाति वर्गों ने किया श्रावणी उपकर्म
सनातन के सभी जाति वर्गों ने किया श्रावणी उपकर्म
हरिओम
कानपुर नगर, रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर शुक्रवार को आर्य समाज दो ब्लॉक गोविंद नगर कानपुर में श्रावणी उपकर्म का कार्यक्रम सनातन के सभी जाति वर्गों को एकसाथ लेकर संपन्न किया गया। विनोद कुमार आर्य ने बताया कि यह एक गुरुकुलीय प्राचीन परंपरा है वैदिक काल में गुरुकुल में पढ़ने वाले प्रत्येक बालक बालिका अध्यापक अध्यापिका तथा सभी गृहस्थियों के लिए यह दिन अति उत्तम माना जाता था क्योंकि इस दिन वह सभी लोग अपने ज्ञान विज्ञान की परंपरा को बढ़ाने के उद्देश्य से और ईश्वर प्राप्ति तथा मोक्ष प्राप्ति के उद्देश्य से यज्ञोपवीत धारण करते थे या बदलते थे।
यज्ञोपवीत को विद्या का चिन्ह माना जाता है तथा इसके तीन धागे पितृ ऋण देव ऋण तथा ऋषि ऋण का सूचक है जिससे उऋण होना चाहिए।यज्ञोपवीत की पांच गांठे मनुष्य को पांच यज्ञ से बँध कर रहने तथा ब्रह्म गाँठ ईश्वर से जुड़े रहने का प्रतीक है। यज्ञोपवीत हर व्यक्ति पहन सकता है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम योगीराज भगवान श्री कृष्णा महान पराक्रमी हनुमान आदि सभी यज्ञोपवीत पहनते थे और अपने धर्म का अनुसरण करते थे। आचार्य विनोद कुमार आर्य जी के आचार्यत्व में सैकड़ो युवाओं ने यज्ञोपवीत धारण किया तथा अपने जीवन से एक बुराई को हटाने तथा एक अच्छाई को अपनाने का संकल्प वेद के मंत्रों द्वारा यज्ञ में आहुति देकर किया। भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्ति के उपरांत विनोद कुमार आर्य पिछले 8 वर्षों से युवाओं में धर्म और राष्ट्र की प्रेरणा भरने का कार्य कर रहे हैं। कानपुर नगर बिठूर तथा उन्नाव आपका कार्य क्षेत्र रहा है जहां आपने कक्षाएं संचालित की हैं। विनोद कुमार आर्य, दीपक अरोड़ा, अमित योगी, अभिषेक दिक्षित, वैभव श्रीवास्तव, आदित्य शर्मा, चंद्रकांता गेरा, संतोष अरोड़ा,प्रकाश वीर आर्य, अनिल चोपडा,कृपा आर्य, जयप्रकाश आर्य तथा अनेक युवाओं के साथ विशिष्ट लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। कृणवंतो विश्वमार्यम अर्थात संसार को श्रेष्ठ बनने के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
हरिओम
कानपुर नगर, रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर शुक्रवार को आर्य समाज दो ब्लॉक गोविंद नगर कानपुर में श्रावणी उपकर्म का कार्यक्रम सनातन के सभी जाति वर्गों को एकसाथ लेकर संपन्न किया गया। विनोद कुमार आर्य ने बताया कि यह एक गुरुकुलीय प्राचीन परंपरा है वैदिक काल में गुरुकुल में पढ़ने वाले प्रत्येक बालक बालिका अध्यापक अध्यापिका तथा सभी गृहस्थियों के लिए यह दिन अति उत्तम माना जाता था क्योंकि इस दिन वह सभी लोग अपने ज्ञान विज्ञान की परंपरा को बढ़ाने के उद्देश्य से और ईश्वर प्राप्ति तथा मोक्ष प्राप्ति के उद्देश्य से यज्ञोपवीत धारण करते थे या बदलते थे।
यज्ञोपवीत को विद्या का चिन्ह माना जाता है तथा इसके तीन धागे पितृ ऋण देव ऋण तथा ऋषि ऋण का सूचक है जिससे उऋण होना चाहिए।यज्ञोपवीत की पांच गांठे मनुष्य को पांच यज्ञ से बँध कर रहने तथा ब्रह्म गाँठ ईश्वर से जुड़े रहने का प्रतीक है। यज्ञोपवीत हर व्यक्ति पहन सकता है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम योगीराज भगवान श्री कृष्णा महान पराक्रमी हनुमान आदि सभी यज्ञोपवीत पहनते थे और अपने धर्म का अनुसरण करते थे। आचार्य विनोद कुमार आर्य जी के आचार्यत्व में सैकड़ो युवाओं ने यज्ञोपवीत धारण किया तथा अपने जीवन से एक बुराई को हटाने तथा एक अच्छाई को अपनाने का संकल्प वेद के मंत्रों द्वारा यज्ञ में आहुति देकर किया। भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्ति के उपरांत विनोद कुमार आर्य पिछले 8 वर्षों से युवाओं में धर्म और राष्ट्र की प्रेरणा भरने का कार्य कर रहे हैं। कानपुर नगर बिठूर तथा उन्नाव आपका कार्य क्षेत्र रहा है जहां आपने कक्षाएं संचालित की हैं। विनोद कुमार आर्य, दीपक अरोड़ा, अमित योगी, अभिषेक दिक्षित, वैभव श्रीवास्तव, आदित्य शर्मा, चंद्रकांता गेरा, संतोष अरोड़ा,प्रकाश वीर आर्य, अनिल चोपडा,कृपा आर्य, जयप्रकाश आर्य तथा अनेक युवाओं के साथ विशिष्ट लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। कृणवंतो विश्वमार्यम अर्थात संसार को श्रेष्ठ बनने के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।




