*हर पांचवीं निवेशक महिला: यूपी में बढ़ी भागीदारी, कानपुर बना उदाहरण*
*डिस्ट्रिक हेड राहुल द्विवेदी*
उत्तर प्रदेश में शेयर बाजार का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अब यह सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाएं भी बड़ी संख्या में निवेश की दुनिया में कदम रख रही हैं। National Stock Exchange of India (एनएसई) की मार्केट पल्स अप्रैल 2026 रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में प्रदेश में महिला निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 19.1 प्रतिशत हो गई है। यानी अब हर पांच में से एक निवेशक महिला है।
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि यह वृद्धि लगातार हो रही है। वर्ष 2023 में महिलाओं की हिस्सेदारी 16.9 प्रतिशत थी, जो 2024 में 17.3 प्रतिशत और 2025 में 18.5 प्रतिशत पहुंची। 2026 में यह आंकड़ा 19.1 प्रतिशत हो गया। हालांकि यह राष्ट्रीय औसत 24.9 प्रतिशत से अभी कम है, लेकिन जिस तेजी से भागीदारी बढ़ रही है, वह महिलाओं में बढ़ती वित्तीय जागरूकता का संकेत है।
Kanpur इस बदलाव का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। शहर में महिलाओं ने म्यूचुअल फंड में उल्लेखनीय निवेश किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में महिलाओं का कुल निवेश 12,600 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसके साथ ही कानपुर का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 37,346 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। शहर में कुल 12.70 लाख म्यूचुअल फंड फोलियो हैं, जिनमें से 3.30 लाख महिलाओं के नाम पर हैं।
पिछले वर्षों के आंकड़े भी इस वृद्धि को स्पष्ट करते हैं। वर्ष 2024-25 में महिलाओं का निवेश 11,500 करोड़ रुपये था, जबकि 2023-24 में यह लगभग 9,800 करोड़ रुपये रहा। इस निरंतर वृद्धि ने यह साबित कर दिया है कि महिलाएं अब पारंपरिक निवेश साधनों से आगे बढ़कर आधुनिक निवेश विकल्पों को अपना रही हैं।
कानपुर की शिक्षिका सारिका शुक्ला इसका उदाहरण हैं। उन्होंने वर्ष 2019 में शेयर बाजार में निवेश शुरू किया। शुरुआत में उनका झुकाव बैंक एफडी की ओर था, लेकिन घटती ब्याज दरों और बढ़ती जानकारी के कारण उन्होंने म्यूचुअल फंड, एसआईपी और ईटीएफ में निवेश करना शुरू किया। आज उनका पोर्टफोलियो लाखों रुपये का हो चुका है। सारिका का कहना है कि शुरुआती दौर में शेयर बाजार जटिल लगा, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म और सीखने की इच्छा ने निवेश को आसान बना दिया।
इसी तरह कृष्णानगर की तूलिका प्रधान ने एक साल पहले ही निवेश की शुरुआत की। पहले उनका निवेश एफडी और आरडी तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने लंबी अवधि के शेयरों और म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू किया। आज उनका पोर्टफोलियो विविध कंपनियों और योजनाओं में फैला हुआ है। तूलिका का मानना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद धैर्य और निरंतर निवेश से ही लाभ संभव है।
विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के पीछे कई कारण हैं। शेयर बाजार में औसत 12 से 20 प्रतिशत तक रिटर्न की संभावना, जबकि एफडी में 5 से 7.8 प्रतिशत तक सीमित ब्याज दर, निवेशकों को आकर्षित कर रही है। इसके अलावा मोबाइल ट्रेडिंग एप्स, डिजिटल केवाईसी और ऑनलाइन खाता खोलने की सुविधाओं ने निवेश प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है।
इसके साथ ही म्यूचुअल फंड और एसआईपी का बढ़ता चलन, वित्तीय शिक्षा का विस्तार और नौकरीपेशा व उद्यमी महिलाओं की संख्या में वृद्धि भी इस बदलाव के प्रमुख कारण हैं। डिजिटल बैंकिंग और इंटरनेट की पहुंच ने छोटे शहरों और जिलों तक निवेश के अवसर पहुंचाए हैं।
गौरतलब है कि यह बदलाव सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। देवरिया, जौनपुर, बस्ती, बलिया, गोंडा, मिर्जापुर, गाजीपुर, सीतापुर, उन्नाव, सुल्तानपुर और शाहजहांपुर जैसे जिलों में भी महिला निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले वर्षों में महिलाओं की हिस्सेदारी राष्ट्रीय औसत के बराबर या उससे अधिक हो सकती है। यह न केवल आर्थिक रूप से महिलाओं को सशक्त बनाएगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश और खासकर कानपुर में महिलाओं का निवेश की ओर बढ़ता रुझान एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। यह दर्शाता है कि महिलाएं अब केवल बचत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समझदारी के साथ निवेश कर अपने भविष्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।




