कानपुर में 425 फर्जी फर्मों का भंडाफोड़, 369 करोड़ की टैक्स चोरी; 309 का पंजीकरण रद्द, 8 पर एफआईआर, 4 गिरफ्तार
डिस्ट्रिक हेड। राहुल द्विवेदी
कानपुर में राज्य वस्तु एवं सेवा कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 425 फर्जी फर्मों के जरिए की जा रही 369 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का खुलासा किया है। विभाग ने अब तक 309 फर्मों का पंजीकरण रद्द, 36 का निलंबन किया है। आठ फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है, जबकि चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मामले की गहन जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है।
कैसे पकड़ी गईं फर्जी फर्में
केंद्रीय क्षेत्राधिकार के नोडल अधिकारी एवं अपर आयुक्त ग्रेड-2, एसआईबी कानपुर जोन द्वितीय कुमार आनंद के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में रेकी, भौतिक सत्यापन, एसआईबी जांच, डेटा एनालिसिस और पंजीयन दस्तावेजों की जांच के दौरान फर्जी संचालन का पता चला।
जांच में सामने आया कि कई फर्में सिर्फ कागजों पर चल रही थीं—माल का वास्तविक परिवहन नहीं, बल्कि फर्जी बिलों के जरिए आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का आदान-प्रदान किया जा रहा था।
आंकड़ों में कार्रवाई
कुल फर्जी फर्में: 425
पंजीकरण रद्द: 309
पंजीकरण निलंबित: 36
टैक्स/आईटीसी हेराफेरी: 369 करोड़ रुपये
एफआईआर: 8 फर्मों पर
गिरफ्तारियां: 4
केंद्रीय अधिकारियों को भेजे गए मामले: 425
स्क्रैप-आयरन कारोबार की आड़
अधिकांश फर्में स्क्रैप, आयरन और स्टील के कारोबार से जुड़ी दिखाकर फर्जी लेन-देन कर रही थीं। अब तक कुमार इंटरप्राइजेज और केटी ट्रेडर्स सहित आठ फर्मों पर एफआईआर दर्ज हुई है। कुमार इंटरप्राइजेज प्रकरण में चार गिरफ्तारियां की गई हैं। 24 मामलों में अलग-अलग थानों में तहरीर दी गई है, जिनमें जल्द एफआईआर की संभावना है।
प्रतिष्ठित पते और नोटरी का दुरुपयोग
जांच में खुलासा हुआ कि शातिरों ने स्वरूपनगर में एक प्रतिष्ठित सीए के आवासीय पते का दुरुपयोग कर फर्जी फर्म पंजीकृत कराई।
2024-25 में दिल्ली-बिहार की फर्मों से 56.27 करोड़ की खरीद दिखाई गई, जो जीएसटीआर-2ए में परिलक्षित नहीं थी (फर्में कैंसिल पाई गईं)।
इसके बावजूद जीएसटीआर-3बी में 155.89 करोड़ की आउटवर्ड सप्लाई दर्शाई गई।
अप्रैल 2025 में बिना खरीद के 54.83 करोड़ की बिक्री दिखाई गई।
निरीक्षण में घोषित व्यापार स्थल आवासीय निकला, बिजली बिल मेल नहीं खाए, मोबाइल नंबर बंद मिला और किरायानामा/हस्ताक्षर संदिग्ध पाए गए। नोटरी सील के गलत इस्तेमाल की बात भी सामने आई—नोटरी करने वाले अधिवक्ता केरल के बताए गए हैं।
आगे की कार्रवाई
एसआईटी स्थानीय पुलिस के साथ हर पहलू की जांच कर रही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि शेष फर्मों पर भी कठोर कार्रवाई की जाएगी और दोषियों से रिकवरी सुनिश्चित की जाएगी।
यह कार्रवाई जीएसटी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी आईटीसी नेटवर्क पर शिकंजा कसने की दिशा में अहम मानी जा रही है।




