नगर निगम की लापरवाही या मिलीभगत? बुद्धेश्वर मंदिर के ‘पिंक टॉयलेट’ पर कब्जे का खेल!
नगर निगम की लापरवाही या मिलीभगत? बुद्धेश्वर मंदिर के ‘पिंक टॉयलेट’ पर कब्जे का खेल!
लखनऊ: कल महाशिवरात्रि है, और राजधानी का ऐतिहासिक बुद्धेश्वर महादेव मंदिर लाखों भक्तों के स्वागत के लिए तैयार है।
एक तरफ नगर निगम जोन 6 के अधिकारी प्रतिदिन साफ-सफाई और अतिक्रमण हटाने का ‘दिखावा’ कर रहे हैं ताकि भक्तों को असुविधा न हो, वहीं दूसरी ओर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
पिंक टॉयलेट के गेट पर सजी दुकान, जिम्मेदार मौन!
बुद्धेश्वर चौराहे पर महिलाओं की सुविधा के लिए करोड़ों की लागत से बने ‘पिंक टॉयलेट’ के ठीक सामने जूस की दुकान सज गई है।
शिवरात्रि के अवसर पर यहाँ लाखों की संख्या में महिला श्रद्धालु दर्शन के लिए आती हैं, लेकिन महिलाओं के लिए बने इस शौचालय के सामने ही काउंटर और टेंट लगाकर इसे बाधित कर दिया गया है।
बड़ा सवाल: आखिर इसका जिम्मेदार कौन?
क्या नगर निगम का अतिक्रमण दस्ता सिर्फ गरीब ठेले वालों को हटाने के लिए है?
पिंक टॉयलेट के ठीक सामने दुकान सज जाना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है:
क्या जोन 6 के अधिकारियों को यह अतिक्रमण दिखाई नहीं देता?
क्या महिलाओं की सुविधा और सुरक्षा से ऊपर किसी का निजी व्यापार है?
दिखावे के सफाई अभियान के बीच इस ‘खास’ दुकान को संरक्षण कौन दे रहा है?
लखनऊ: कल महाशिवरात्रि है, और राजधानी का ऐतिहासिक बुद्धेश्वर महादेव मंदिर लाखों भक्तों के स्वागत के लिए तैयार है।
एक तरफ नगर निगम जोन 6 के अधिकारी प्रतिदिन साफ-सफाई और अतिक्रमण हटाने का ‘दिखावा’ कर रहे हैं ताकि भक्तों को असुविधा न हो, वहीं दूसरी ओर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
पिंक टॉयलेट के गेट पर सजी दुकान, जिम्मेदार मौन!
बुद्धेश्वर चौराहे पर महिलाओं की सुविधा के लिए करोड़ों की लागत से बने ‘पिंक टॉयलेट’ के ठीक सामने जूस की दुकान सज गई है।
शिवरात्रि के अवसर पर यहाँ लाखों की संख्या में महिला श्रद्धालु दर्शन के लिए आती हैं, लेकिन महिलाओं के लिए बने इस शौचालय के सामने ही काउंटर और टेंट लगाकर इसे बाधित कर दिया गया है।
बड़ा सवाल: आखिर इसका जिम्मेदार कौन?
क्या नगर निगम का अतिक्रमण दस्ता सिर्फ गरीब ठेले वालों को हटाने के लिए है?
पिंक टॉयलेट के ठीक सामने दुकान सज जाना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है:
क्या जोन 6 के अधिकारियों को यह अतिक्रमण दिखाई नहीं देता?
क्या महिलाओं की सुविधा और सुरक्षा से ऊपर किसी का निजी व्यापार है?
दिखावे के सफाई अभियान के बीच इस ‘खास’ दुकान को संरक्षण कौन दे रहा है?




