*उन्नाव में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल, 5 डे वर्किंग की मांग, बोले- समझौते के डेढ़ साल बाद भी नहीं लागू हुआ नियम।
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ख़बर उन्नाव से है जहां मंगलवार को सभी बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। यह प्रदर्शन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के तत्वावधान में केंद्र सरकार के खिलाफ आयोजित किया गया, जिसमें बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के 9 बड़े संगठनों ने भाग लिया। हड़ताल रात 12 बजे तक जारी रहेगी। बैंक यूनियन नेताओं ने बताया कि यह हड़ताल सरकार को जगाने के उद्देश्य से की जा रही है। उनका आरोप है कि सरकार ने 12वें द्विपक्षीय समझौते (बाइपरटाइट सेटलमेंट) और 9वें जॉइंट नोट के तहत किए गए वादों को पूरा नहीं किया है। भारतीय बैंकिंग संघ (IBA) और बैंक यूनियनों के बीच पांच दिवसीय बैंकिंग प्रणाली को लेकर सहमति बनी थी। IBA ने बैंक कर्मचारियों की इस मांग को स्वीकार कर लिया था, लेकिन इसे अभी तक सरकार की मंजूरी नहीं मिली है।
बता दे कि यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार, यह समझौता 8 मार्च 2024 को हुआ था। लगभग डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद, पांच दिवसीय बैंकिंग से संबंधित फाइल आज भी वित्त मंत्रालय में लंबित है। इसी उपेक्षा के विरोध में बैंक कर्मचारी हड़ताल पर जाने को मजबूर हुए हैं। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बैंक कर्मचारी लगातार काम के दबाव और तनाव में रहते हैं। मानसिक शांति, सामाजिक न्याय और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए पांच दिवसीय कार्य प्रणाली बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मांग केवल छुट्टी तक सीमित नहीं है। कर्मचारियों ने जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अपने दैनिक कार्य समय में 40 मिनट की बढ़ोतरी भी स्वीकार की है। यूनियन नेताओं ने बताया कि यदि पांच दिवसीय बैंकिंग लागू होती है, तो बैंक कर्मचारी रोजाना 40 मिनट अधिक समय तक जनता की सेवा के लिए उपलब्ध रहेंगे, जिससे आम लोगों को कोई असुविधा नहीं होगी। इसी शर्त पर IBA के साथ समझौता हुआ था, लेकिन सरकार ने इसे अब तक मंजूरी नहीं दी है। बैंक कर्मियों ने सरकार से इस मामले में सकारात्मक रवैया अपनाने और पांच दिवसीय बैंकिंग प्रणाली को जल्द से जल्द लागू करने की मांग की है। इनकम टैक्स विभाग, एलआईसी और जीआईसी जैसे अन्य वित्तीय संस्थानों में 5 दिवसीय कार्य प्रणाली लागू है, तो बैंक कर्मचारियों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
बाइट – दीपक तिवारी डिस्टिक सेक्रेट्री।
*अस्तित्व कुशवाहा संवाददाता*




