नौ माह से बंद केएफसीएल को अब अदाणी समूह चलाएगा, 20 दिसंबर को हुआ प्लांट का निरीक्षण
डिस्ट्रिक हेड। राहुल द्विवेदी
कानपुर। पनकी स्थित कानपुर फर्टिलाइजर एंड केमिकल्स लिमिटेड (केएफसीएल) प्लांट को अब अदाणी समूह संचालित करेगा। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) से मंजूरी मिलने के बाद अदाणी समूह के अधिकारियों ने 20 दिसंबर 2025 को प्लांट का निरीक्षण कर परिसंपत्तियों, उत्पादन क्षमता और कर्मचारियों की स्थिति का आकलन किया। नौ माह से बंद पड़े इस प्लांट के पुनः संचालन से कानपुर के औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
भारी कर्ज, गैस व बिजली आपूर्ति बाधित होने और सब्सिडी के ऊर्जा मानकों के नवीनीकरण न होने के कारण केएफसीएल में 1 अप्रैल 2025 से उत्पादन बंद कर दिया गया था। इससे पहले इस प्लांट का संचालन जेपी एसोसिएट ग्रुप द्वारा किया जा रहा था। यहां चांद छाप यूरिया तथा बाद में भारत छाप यूरिया का उत्पादन होता रहा है। प्लांट की दैनिक उत्पादन क्षमता करीब 2100 मीट्रिक टन थी।
पिछले वर्ष बकाया भुगतान के चलते गेल ने केएफसीएल की गैस आपूर्ति बंद कर दी थी। प्रबंधन ने सरकार से मिलने वाली सब्सिडी के माध्यम से भुगतान का आश्वासन देते हुए दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में गेल को 538 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। इसी दौरान केस्को ने भी बकाया राशि के कारण बिजली आपूर्ति काट दी, जिससे उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया।
इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी भुगतान के लिए तय ऊर्जा मानक की वैधता 31 मार्च 2025 तक ही रही, जिसका नवीनीकरण नहीं किया गया। पर्याप्त सब्सिडी आदेश के अभाव में 1 अप्रैल 2025 से प्लांट बंद कर दिया गया और कर्मचारियों की छंटनी की प्रक्रिया शुरू हुई। बड़ी संख्या में कर्मचारियों का जेपी समूह की अन्य इकाइयों में तबादला भी किया गया।
वर्तमान में प्लांट में लगभग 100 स्थायी और अस्थायी कर्मचारी ही शेष हैं, जिनके वेतन भुगतान से जुड़ा विवाद श्रम न्यायालय में विचाराधीन है। भारतीय उर्वरक श्रमिक संघ के अध्यक्ष सुखदेव मिश्रा ने बताया कि एनसीएलटी ने 14 नवंबर 2025 को अदाणी समूह की बिड को मंजूरी दी थी। इस दौड़ में डालमिया, वेदांता, जेपी समूह और पीएनसीएल भी शामिल थे। निरीक्षण के दौरान अदाणी समूह ने संपत्तियों का मूल्यांकन और प्लांट की तकनीकी स्थिति का विस्तृत जायजा लिया है। जल्द ही उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
1500 करोड़ से हुआ था प्लांट का पुनर्जीवन
1967 में कमीशन हुआ पनकी फर्टिलाइजर प्लांट पहले भी आईईएल और डंकन समूह के समय बंदी झेल चुका है। लगभग दस वर्षों तक बंद पड़े इस प्लांट को जेपी समूह ने 2012 से 2015 के बीच करीब 1500 करोड़ रुपये के निवेश से पुनर्जीवित किया था। उस दौरान श्रमिकों और कर्मचारियों के लगभग 90 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान किया गया तथा फीड स्टॉक को नाफ्था से प्राकृतिक गैस में परिवर्तित किया गया। बीते दस




