**15–35% तक महंगे होंगे पान मसाला-तंबाकू, कारोबार पर कड़ी निगरानी
लापरवाही पर जुर्माना, मशीनों का होगा भौतिक सत्यापन**
डिस्ट्रिक हेड। राहुल द्विवेदी
कानपुर। एक फरवरी से पान मसाला, तंबाकू और गुटखा उत्पादों की कीमतों में बड़ा इजाफा हो सकता है। केंद्र सरकार की नई कर व्यवस्था के तहत इन उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी के साथ उत्पादन क्षमता आधारित स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर और अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। इसके चलते पान मसाला और तंबाकू के दाम 15 से 35 प्रतिशत तक बढ़ने की आशंका है।
शहर में पान मसाला की करीब 12 इकाइयां संचालित हैं। नई व्यवस्था के तहत हर फैक्टरी को अलग-अलग पंजीकरण कराना होगा और मशीनों की संख्या व उनकी अधिकतम उत्पादन क्षमता की जानकारी देना अनिवार्य होगा। कर विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ा हुआ कर बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा।
90 दिन में होगा मशीनों का सत्यापन
मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश की जीएसटी कमेटी के चेयरमैन संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि सरकार का मानना है कि पान मसाला और तंबाकू कारोबार में वास्तविक उत्पादन व बिक्री के आंकड़े छिपाए जाते हैं, जिससे राजस्व की हानि होती है। इसी कारण पुराने उपकर को हटाकर नया क्षमता आधारित उपकर लागू किया जा रहा है।
फैक्टरी संचालकों को सात दिन के भीतर मशीनों की अधिकतम रेटेड स्पीड घोषित करनी होगी। जीएसटी और एक्साइज विभाग के अधिकारी 90 दिन के भीतर मशीनों का भौतिक सत्यापन करेंगे। उपकर का भुगतान हर महीने की सात तारीख से पहले करना होगा। देरी होने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा।
पुरानी कंपाउंडिंग व्यवस्था जैसी प्रणाली
कर विशेषज्ञों के अनुसार नई व्यवस्था पहले लागू रही कंपाउंडिंग प्रणाली की तर्ज पर है, जिसमें प्रति मशीन 18 लाख रुपये शुल्क तय था। इसका उद्देश्य पान मसाला इकाइयों की निगरानी मजबूत करना और कर चोरी रोकना है।
कानपुर सीए सीपीई स्टडी सर्किल के डिप्टी कन्वीनर सीए नितिन सिंह और इनकम टैक्स बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री सीए राजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगेगा, जबकि पान मसाला पर उत्पादन क्षमता के आधार पर सेस लगाया जाएगा। चबाने वाला तंबाकू, जर्दा और गुटखा इस दायरे में आएंगे।
उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा बोझ
जीएसटी दरों में बदलाव के तहत तंबाकू और पान मसाला पर 40 प्रतिशत जीएसटी लगेगा, जबकि बीड़ी पर 18 प्रतिशत की दर पहले की तरह बनी रहेगी। ये कर जीएसटी सेस और उत्पाद शुल्क के अतिरिक्त होंगे।
द किराना मर्चेंट एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अलंकार ओमर के अनुसार कानपुर में पान मसाला और तंबाकू का घोषित-अघोषित कारोबार 3000 करोड़ रुपये से अधिक का है। नए कर ढांचे से उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा और कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
कर चोरी रोकने को बढ़ी सख्ती
जीएसटी लागू होने के बाद यह उद्योग संवेदनशील श्रेणी में रखा गया था, लेकिन इसके बावजूद चोरी-छिपे उत्पादन और बिक्री की शिकायतें सामने आती रहीं। एक मशीन पांच घंटे में करीब 15 हजार पाउच तैयार कर सकती है, जबकि कई कारोबारी वास्तविक उत्पादन से कम आंकड़े दिखाते रहे हैं। इसी कारण तैयार माल, कच्चे माल और पैकिंग स्तर पर कर चोरी की संभावना बनी रहती है।
सरकार का दावा है कि नई क्षमता आधारित व्यवस्था से कर चोरी पर लगाम लगेगी, हालांकि कारोबारियों को इससे बढ़ती लागत और अवैध व्यापार बढ़ने की भी आशंका है।




