कानपुर: चौकी की चौखट पर ‘दंगल’, मूकदर्शक बनी रही पुलिस; खाकी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
* *राहुल द्विवेदी (डिस्ट्रिक्ट हेड, टाइम्स एंड स्पेस)*
कानपुर। शहर में जहाँ एक ओर पुलिस कमिश्नरेट को आधुनिक तकनीक और नए सुरक्षा वाहनों से लैस किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली और तत्परता की पोल खुलती नज़र आ रही है। ताज़ा मामला कानपुर कमिश्नरेट के पश्चिमी जोन का है, जहाँ कल्याणपुर थाना क्षेत्र के स्टेशन रोड (पनकी रोड) चौकी के ठीक सामने दो पक्षों की महिलाओं के बीच जमकर हाई वोल्टेज ड्रामा और मारपीट हुई।
*चौकी के बाहर ‘सड़क युद्ध’*
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद की शुरुआत मामूली कहासुनी से हुई थी, लेकिन देखते ही देखते इसने उग्र रूप धारण कर लिया। स्टेशन रोड चौकी के ठीक बाहर दोनों पक्षों की महिलाओं ने एक-दूसरे को सरेआम भद्दी-भद्दी गालियाँ दीं और फिर उनके बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई। हैरानी की बात यह रही कि यह सब उस जगह हो रहा था जहाँ कानून के रखवाले तैनात होते हैं, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी स्थिति को नियंत्रित करने के बजाय मूकदर्शक बने तमाशा देखते रहे।
*राहगीर बनाते रहे वीडियो, पुलिस रही नदारद*
सड़क पर महिलाओं के बीच हो रही इस हाथापाई के कारण स्टेशन रोड पर राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। जहाँ एक ओर लोग अपने मोबाइल फोन से इस पूरी घटना का वीडियो बनाने में मशगूल थे, वहीं चौकी पुलिस की निष्क्रियता ने लोगों को आक्रोशित कर दिया। स्थानीय लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि पुलिस समय रहते हस्तक्षेप करती, तो मामला इतना नहीं बढ़ता।
*कानून-व्यवस्था पर उठते सवाल*
चौकी के बाहर खुलेआम हुए इस हंगामे ने कानपुर पुलिस के इकबाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि जब पुलिस अपनी नाक के नीचे हो रहे अपराध या विवाद को नहीं रोक पा रही, तो वह आम जनता को सुरक्षा का भरोसा कैसे दिलाएगी?
बड़ा सवाल: क्या पुलिसकर्मियों को विवाद शांत कराने की ट्रेनिंग नहीं दी गई है या फिर जानबूझकर मामले को नजरअंदाज किया गया?
वर्तमान स्थिति: हालांकि बाद में हंगामा शांत हुआ, लेकिन इस मामले में अब तक पुलिस द्वारा किसी ठोस कार्रवाई या एफआईआर की पुष्टि नहीं की गई है।
पश्चिमी जोन के उच्च अधिकारियों को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए ताकि भविष्य में पुलिस चौकी की गरिमा इस तरह सरेराह तार-तार न हो।




