ऐतिहासिक और पौराणिक नगरी कालपी में महाभारत काल से जुड़ा पचपिंडा देवी मंदिर, जहां पांडवों ने किया था अज्ञातवास

ब्यूरो चीफ जालौन : शैलेन्द्र सिंह तोमर
कालपी (जालौन) ऐतिहासिक और पौराणिक नगरी कालपी में स्थित पचपिंडा देवी मंदिर महाभारत काल से जुड़ा है। स्थानीय पुरातत्व और कथाओं के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान कालपी में निवास किया और इस दौरान मंदिर की स्थापना की। यह केवल अज्ञातवास का स्थल नहीं था, बल्कि धर्म और अध्यात्म का अद्भुत संगम भी रहा।
मंदिर के सेवक संजय महाराज के अनुसार, पांडवों ने मंदिर में प्रारंभिक रूप से पांच देवी-देवियों की प्रतिमाएं स्थापित कीं। इसके अलावा 50 मठ स्थानीय अग्रवाल और धनिक परिवारों द्वारा बनवाए गए। संजय महाराज ने बताया कि इन 50 मठों के स्थापितकर्ताओं के नाम समय के साथ भुला दिए गए।
पचपिंडा देवी मंदिर का वर्तमान स्वरूप:
मंदिर कालपी के काजीपुरा मोहल्ले में स्थित है।
मंदिर की भव्यता के लिए पर्यटन विभाग ने पहले 20 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
वर्ष 2015 में नगर के निवासी पवन सुहाने ने 20 लाख रुपये की लागत से मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया।
मंदिर में तीन सेट लगाए गए, जिनमें से 3,70 हजार रुपये की लागत शिक्षक और विधायक यजदत्त शर्मा की निधि से हुई।
इतिहासकार अयोध्या प्रसाद कुमुद के अनुसार, 11वीं शताब्दी में प्रिथ्वीराज चौहान जब महोबा के आल्हा-उदल से युद्ध करने आए, तब उन्होंने भी पचपिंडा देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की।
वर्तमान समय में मंदिर में 55 अलग-अलग स्वरूपों में देवी-देवियों की प्रतिमाएं स्थापित हैं। संजय महाराज का कहना है कि यह मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के लिए चमत्कारी है और यहां मन्नत मांगने वाले लोग कभी खाली हाथ नहीं लौटते।
संजय महाराज ने यह भी बताया कि जिन अग्रवाल परिवारों ने 50 मठों की स्थापना की, देवी माता ने उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर मार्गदर्शन दिया। वर्तमान में पवन सुहाने मंदिर में सेवा करते हैं और श्रद्धालु नियमित रूप से यहां आते हैं।
मंदिर का विशेष आकर्षण हर साल नवरात्रि के समय आयोजित होने वाला सजावट, पूजा-अर्चना और रात्रि जागरण कार्यक्रम है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।




