*नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी में बना बवंडर, 16 घंटों में 20 राज्यों में मचेगी तबाही, 65 KMpH की रफ्तार से चलेंगी हवाएं*
*01 सितंबर मंगलवार 2026-27*
*नई दिल्ली:* बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसमी सिस्टम के कारण देश के 20 राज्यों में भारी बारिश और तूफान का अलर्ट जारी किया गया है, जिसमें 65 KMpH की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।
*मानसून का रौद्र रूप और नया अलर्ट:*
सितंबर के महीने की शुरुआत के साथ ही देश के एक बड़े हिस्से में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी ने एक बेहद महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है, जिसके अनुसार बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना एक शक्तिशाली मौसमी सिस्टम अब उत्तर और मध्य भारत की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस सिस्टम के प्रभाव के कारण आने वाले 16 घंटों के भीतर दिल्ली से लेकर बिहार और ओडिशा तक के लगभग 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मौसम का कहर देखने को मिल सकता है। इस दौरान कुछ इलाकों में तूफानी हवाओं की रफ्तार 65 KMpH तक पहुंच सकती है, जो जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।
*मौसम का पूर्वानुमान और साइक्लोनिक सर्कुलेशन:*
मौसम विभाग के मुताबिक, गंगीय पश्चिम बंगाल और इससे सटे उत्तरी तटीय ओडिशा, झारखंड और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। यह मौसमी सिस्टम अगले 48 घंटों के दौरान पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने वाला है। यह सिस्टम मुख्य रूप से उत्तर ओडिशा और झारखंड से होकर गुजरेगा। इसके अलावा, बंगाल की खाड़ी में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। यही कारण है कि बुधवार, 2 सितंबर को देश के बड़े हिस्से में भारी से बहुत भारी बारिश और तेज आंधी-तूफान की चेतावनी दी गई है।
*दिल्ली-एनसीआर में बारिश का जोर:*
दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में पिछले कुछ दिनों से मौसम अपेक्षाकृत सूखा बना हुआ था, लेकिन अब स्थिति बदलने वाली है। आईएमडी ने संभावना जताई है कि बुधवार को दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में बारिश की गतिविधियां अचानक तेज हो जाएंगी। आसमान में घने बादल छाए रहेंगे और कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। बारिश के कारण राजधानी की सड़कों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम की पुरानी समस्याएं फिर से सिर उठा सकती हैं। इसके अलावा, बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए लोगों को पेड़ों और खुले बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी गई है। हालांकि बारिश से तापमान में थोड़ी गिरावट जरूर आएगी, लेकिन उमस बरकरार रहने की पूरी संभावना है। यह सिलसिला 3 और 4 सितंबर को भी जारी रह सकता है।
*उत्तर प्रदेश का हाल:*
उत्तर प्रदेश में बुधवार से मानसून की सक्रियता में बड़ा उछाल आने वाला है। राज्य के पूर्वी हिस्सों में बारिश का सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिलेगा। कई जिलों में रुक-रुककर हो रही बारिश और गरज-चमक का दौर जनजीवन को प्रभावित कर सकता है। निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने और नदियों के बहाव पर प्रशासन को नजर रखने के लिए कहा गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 1 से 5 सितंबर के बीच अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की भविष्यवाणी की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों और कच्चे रास्तों पर भी पानी जमा होने की समस्या हो सकती है, जिससे आवागमन प्रभावित होगा।
*उत्तराखंड और पहाड़ों का संकट:*
पर्वतीय राज्य उत्तराखंड के लिए आने वाले कुछ दिन चिंता बढ़ाने वाले हैं। 2 से 7 सितंबर के बीच राज्य में भारी बारिश का दौर चलने वाला है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का सीधा मतलब है कि भूस्खलन और चट्टानें गिरने का खतरा बढ़ गया है। सड़कों पर मलबा आने से यातायात पूरी तरह ठप हो सकता है। बरसाती नालों और नदियों में अचानक उफान आना आम बात हो जाएगी। चारधाम यात्रा या अन्य पहाड़ी मार्गों पर जाने वाले पर्यटकों को बहुत सावधानी बरतने और यात्रा से पहले मौसम की सटीक जानकारी लेने का सुझाव दिया गया है।
*बिहार और झारखंड पर असर:*
बिहार में मौसम विभाग ने ‘डबल अटैक’ की चेतावनी दी है, जिसमें भारी बारिश के साथ तेज आंधी का पूर्वानुमान है। हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है। 2 से 4 सितंबर तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। झारखंड इस मौसमी सिस्टम के प्रभाव के केंद्र में है। निम्न दबाव के क्षेत्र की सक्रियता के कारण राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश के साथ झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है। नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है।
*मध्य भारत में सबसे अधिक बारिश:*
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ पर मानसून का सबसे ज्यादा जोर दिखाई देने की उम्मीद है। आईएमडी ने छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। लगातार कई घंटों तक होने वाली बारिश के कारण कई जिलों में जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। नदियों के उफान पर आने का भी खतरा बना हुआ है, इसलिए स्थानीय प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
*ओडिशा और पश्चिम बंगाल की स्थिति:*
जिस निम्न दबाव के क्षेत्र ने पूरे देश के मौसम को प्रभावित किया है, उसका असर पश्चिम बंगाल और ओडिशा में सबसे पहले और सबसे अधिक दिखाई देगा। 2 सितंबर को इन दोनों राज्यों के तटीय इलाकों में भारी बारिश होगी। यहाँ हवाओं की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तटीय समुदायों को सुरक्षा के निर्देश दिए गए हैं।
*समुद्री चेतावनी और अन्य राज्य:*
समुद्र में भी मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। अरब सागर में सोमालिया और ओमान के तटों के पास हवाओं की गति 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की संभावना है, जो कभी-कभी 65 किलोमीटर तक भी पहुंच सकती है। बंगाल की खाड़ी के समुद्री इलाकों, विशेषकर तमिलनाडु और श्रीलंका के पास के क्षेत्रों में भी खराब मौसम का अलर्ट है। पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के साथ-साथ दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र में भी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है।




