*उन्नाव में भूमि विवाद, पीड़ित परिवारों ने सर्वे विभाग पर लगाए*उन्नाव में भूमि विवाद, पीड़ित परिवारों ने सर्वे विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग*
उन्नाव। जनपद के पीपरखेड़ा क्षेत्र में भूमि विवाद को लेकर कई परिवारों ने सर्वे विभाग और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों का कहना है कि लगभग 34 वर्ष पूर्व खरीदी गई भूमि पर बने निर्माण को 27 अगस्त 2024 को बिना पर्याप्त सूचना और दस्तावेजों की जांच किए बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। पीड़ित परिवारों के अनुसार उन्होंने गाटा संख्या 459 स्थित भूमि पर वर्षों पहले प्लॉट खरीदकर कब्जा लिया था और समय-समय पर प्रशासनिक जांचों में उनके कब्जे की पुष्टि भी की गई थी। उनका आरोप है कि सर्वे विभाग ने मूल भू-मानचित्र में हेरफेर कर फर्जी नक्शे के आधार पर उनकी भूमि को सरकारी भूमि दर्शाया, जिसके चलते उनका निर्माण गिरा दिया गया।
परिवारों का दावा है कि वर्ष 2016 से 2023 तक विभिन्न प्रशासनिक मंचों, समाधान दिवसों और आईजीआरएस पर हुई जांचों में उनके पक्ष में रिपोर्ट दी गई थी तथा निर्माण कार्य पर किसी प्रकार की रोक नहीं बताई गई थी। इसके बावजूद निर्माण ध्वस्त किए जाने से उन्हें भारी आर्थिक, मानसिक और सामाजिक क्षति हुई है।
पीड़ितों ने मामले की किसी स्वतंत्र और उच्च स्तरीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, आर्थिक क्षति की भरपाई कराने तथा भूमि पर पुनः निर्माण की अनुमति दिए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि न्याय न मिलने से उनमें गहरा आक्रोश और निराशा है तथा प्रशासन को उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान करना चाहिए।
*अस्तित्व कुशवाहा संवाददाता* गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग*
उन्नाव। जनपद के पीपरखेड़ा क्षेत्र में भूमि विवाद को लेकर कई परिवारों ने सर्वे विभाग और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों का कहना है कि लगभग 34 वर्ष पूर्व खरीदी गई भूमि पर बने निर्माण को 27 अगस्त 2024 को बिना पर्याप्त सूचना और दस्तावेजों की जांच किए बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। पीड़ित परिवारों के अनुसार उन्होंने गाटा संख्या 459 स्थित भूमि पर वर्षों पहले प्लॉट खरीदकर कब्जा लिया था और समय-समय पर प्रशासनिक जांचों में उनके कब्जे की पुष्टि भी की गई थी। उनका आरोप है कि सर्वे विभाग ने मूल भू-मानचित्र में हेरफेर कर फर्जी नक्शे के आधार पर उनकी भूमि को सरकारी भूमि दर्शाया, जिसके चलते उनका निर्माण गिरा दिया गया।
परिवारों का दावा है कि वर्ष 2016 से 2023 तक विभिन्न प्रशासनिक मंचों, समाधान दिवसों और आईजीआरएस पर हुई जांचों में उनके पक्ष में रिपोर्ट दी गई थी तथा निर्माण कार्य पर किसी प्रकार की रोक नहीं बताई गई थी। इसके बावजूद निर्माण ध्वस्त किए जाने से उन्हें भारी आर्थिक, मानसिक और सामाजिक क्षति हुई है।
पीड़ितों ने मामले की किसी स्वतंत्र और उच्च स्तरीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, आर्थिक क्षति की भरपाई कराने तथा भूमि पर पुनः निर्माण की अनुमति दिए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि न्याय न मिलने से उनमें गहरा आक्रोश और निराशा है तथा प्रशासन को उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान करना चाहिए।
*अस्तित्व कुशवाहा संवाददाता*




