कानपुर में डिजिटल प्रशासन व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है।
कानपुर नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट संदिग्ध साइबर हमले का शिकार हो गई, जिसके बाद निगम की तमाम महत्वपूर्ण ऑनलाइन सेवाएं अचानक बंद करनी पड़ीं। वेबसाइट में छेड़छाड़ की आशंका सामने आने के बाद प्रशासनिक और तकनीकी विभागों में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय स्तर से लेकर दिल्ली तक साइबर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं। बताया जा रहा है कि बुधवार देर रात नगर निगम की वेबसाइट पर असामान्य गतिविधियां दिखाई देने लगीं। तकनीकी टीम ने जब सर्वर और पोर्टल की जांच शुरू की तो सिस्टम में अनधिकृत एक्सेस और संभावित डेटा छेड़छाड़ के संकेत मिले। शुरुआती जांच में मामला साइबर अटैक से जुड़ा माना जा रहा है। किसी बड़े नुकसान या डेटा लीक की आशंका को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने एहतियातन पूरी वेबसाइट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया।
वेबसाइट बंद होने का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ा है। जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, हाउस टैक्स जमा करने, ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने, व्यापार लाइसेंस और अन्य डिजिटल सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं। रोजाना सैकड़ों लोग इन सेवाओं का उपयोग करते हैं, लेकिन सिस्टम बंद होने के कारण लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई लोग जरूरी दस्तावेज न मिलने के कारण सरकारी और निजी कार्यों में अटक गए हैं।
मामलेकानपुर में डिजिटल प्रशासन व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। कानपुर नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट संदिग्ध साइबर हमले का शिकार हो गई, जिसके बाद निगम की तमाम महत्वपूर्ण ऑनलाइन सेवाएं अचानक बंद करनी पड़ीं। वेबसाइट में छेड़छाड़ की आशंका सामने आने के बाद प्रशासनिक और तकनीकी विभागों में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय स्तर से लेकर दिल्ली तक साइबर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं। बताया जा रहा है कि बुधवार देर रात नगर निगम की वेबसाइट पर असामान्य गतिविधियां दिखाई देने लगीं। तकनीकी टीम ने जब सर्वर और पोर्टल की जांच शुरू की तो सिस्टम में अनधिकृत एक्सेस और संभावित डेटा छेड़छाड़ के संकेत मिले। शुरुआती जांच में मामला साइबर अटैक से जुड़ा माना जा रहा है। किसी बड़े नुकसान या डेटा लीक की आशंका को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने एहतियातन पूरी वेबसाइट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया।
वेबसाइट बंद होने का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ा है। जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, हाउस टैक्स जमा करने, ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने, व्यापार लाइसेंस और अन्य डिजिटल सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं। रोजाना सैकड़ों लोग इन सेवाओं का उपयोग करते हैं, लेकिन सिस्टम बंद होने के कारण लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई लोग जरूरी दस्तावेज न मिलने के कारण सरकारी और निजी कार्यों में अटक गए हैं।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए साइबर सेल, आईटी एक्सपर्ट और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम जांच में जुट गई है। सर्वर लॉग, बैकअप डेटा और एक्सेस हिस्ट्री की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हमला किस माध्यम से किया गया और क्या किसी संवेदनशील डेटा तक पहुंच बनाई गई है। शासन स्तर पर भी पूरी रिपोर्ट भेजी गई है और उच्च अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि नगर निगम जैसे संस्थानों के सर्वर में लाखों नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा मौजूद रहता है। ऐसे में यदि डेटा चोरी या रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की पुष्टि होती है तो मामला बेहद गंभीर हो सकता है। साइबर विशेषज्ञ लगातार सरकारी वेबसाइटों की सुरक्षा मजबूत करने और नियमित सिक्योरिटी ऑडिट कराने की जरूरत बता रहे हैं। की संवेदनशीलता को देखते हुए साइबर सेल, आईटी एक्सपर्ट और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम जांच में जुट गई है। सर्वर लॉग, बैकअप डेटा और एक्सेस हिस्ट्री की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हमला किस माध्यम से किया गया और क्या किसी संवेदनशील डेटा तक पहुंच बनाई गई है। शासन स्तर पर भी पूरी रिपोर्ट भेजी गई है और उच्च अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि नगर निगम जैसे संस्थानों के सर्वर में लाखों नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा मौजूद रहता है। ऐसे में यदि डेटा चोरी या रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की पुष्टि होती है तो मामला बेहद गंभीर हो सकता है। साइबर विशेषज्ञ लगातार सरकारी वेबसाइटों की सुरक्षा मजबूत करने और नियमित सिक्योरिटी ऑडिट कराने की जरूरत बता रहे हैं।




