*नर्सिंगहोम बना ‘अखाड़ा’: शव उठाने को लेकर 12 घंटे हंगामा, दरोगा की वर्दी फाड़ी; IV स्टैंड से पुलिस टीम पर हमला*
*डिस्ट्रिक हेड राहुल द्विवेदी*
कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र स्थित कैलाश विहार के जीवन ज्योति हॉस्पिटल में मरीज की मौत के बाद सोमवार को जमकर बवाल हो गया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने पहुंची पुलिस टीम पर परिजनों और रिश्तेदारों ने हमला बोल दिया। चौकी इंचार्ज की वर्दी फाड़ दी गई, जबकि महिला दरोगा समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। अस्पताल परिसर देर रात तक रणक्षेत्र बना रहा।
मिली जानकारी के अनुसार, गौरव सिंह को बवासीर की शिकायत के चलते शनिवार रात अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने पहले खून की कमी बताकर दो यूनिट ब्लड चढ़ाया और बाद में ऑपरेशन किया गया। सोमवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे उपचार के दौरान गौरव की मौत हो गई। मौत के बाद परिजन भड़क उठे और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए एफआईआर और मुआवजे की मांग करने लगे।
सुबह कंट्रोल रूम की सूचना पर पीआरवी और पनकी रोड चौकी पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन परिजन कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। पुलिस पोस्टमार्टम के बाद जांच और कार्रवाई की बात कहती रही, जबकि परिजन पहले मुकदमा दर्ज कराने की मांग करते रहे। इसी तनातनी के बीच शव को अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में रखकर परिजन लगातार हंगामा करते रहे।
बताया गया कि अस्पताल प्रबंधन ने वार्ड की बिजली आपूर्ति बंद करा दी, जिससे माहौल और बिगड़ गया। दोपहर तक शव से दुर्गंध आने लगी तो अन्य मरीजों और तीमारदारों ने भी विरोध जताना शुरू कर दिया। शाम में एसीपी कल्याणपुर ने मौके पर पहुंचकर समझाने का प्रयास किया, लेकिन बातचीत बेनतीजा रही।
रात करीब आठ बजे चौकी इंचार्ज विपिन मोरल महिला दरोगा और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ दोबारा अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि पुलिस ने शव को जबरन उठाने की कोशिश की, जिसके बाद परिजन और रिश्तेदार आक्रोशित हो गए। देखते ही देखते महिलाएं और पुरुष पुलिस टीम से भिड़ गए।
हंगामे के दौरान परिजनों ने ग्लूकोज और ब्लड चढ़ाने वाले आईवी स्टैंड निकालकर पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। चौकी इंचार्ज विपिन मोरल की वर्दी फट गई और उन्हें जान बचाकर बाहर भागना पड़ा। महिला दरोगा के साथ भी मारपीट की गई। बताया जा रहा है कि एक महिला दरोगा के पेट में लात लगने से वह जमीन पर गिर पड़ीं। इस दौरान अस्पताल में कुर्सियां, दरवाजे और अन्य सामान भी तोड़ दिया गया।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस अस्पताल प्रबंधन के पक्ष में काम कर रही थी। उनका कहना है कि पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे बंद कराकर शव हटाने की कोशिश की, जिससे लोग और भड़क गए। वहीं पुलिस ने घटना के बाद करीब एक दर्जन लोगों को हिरासत में लिया, लेकिन बाद में राजनीतिक दबाव और जनप्रतिनिधियों की पैरवी के चलते कार्रवाई धीमी पड़ गई।
मृतक के परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि गौरव का पहले औरैया के बेला स्थित एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। वहां से एक दलाल ने बेहतर इलाज का झांसा देकर उन्हें कानपुर के इस नर्सिंगहोम में भर्ती कराया था। अब परिजन पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
घटना के बाद अस्पताल परिसर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और वीडियो फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।




