करनाल,27
साहित्यकारों की अपनी एक पहचान,,
रिपोर्टर राजेन्द्र कैम
मन की उड़ान साहित्यिक संस्था (रजि.) का बाईसवां शाम -ए -ग़ज़ल साहित्यिक कार्यक्रम होटल थ्रोसं अल्फा सिटी करनाल में आयोजित किया गया,जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुभाष सैनी ने की, मुख्य अतिथि डॉ. यजुवेंद्र सिंह मैहला रहे, विशिष्ट अतिथि डॉ. पारूल मैहला रही।
इस अवसर पर साहित्यकार डॉ. सुभाष सैनी की बारहवीं पुस्तक हिन्दी लघुकथा विश्लेषण एवं मूल्यांकन का विमोचन मुख्य अतिथि व उपस्थित साहित्यकारों द्वारा किया गया। इससे पहले भी साहित्यकार डॉ. सुभाष सैनी की अलग-अलग विधाओं में ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित है।
काव्य की शुरुआत करते हुए कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. सुभाष सैनी ने कहा, जिन्दगी इक हादसा है आजकल, सांस लेना भी भी सजा है आजकल, मुख्य अतिथि डॉ.यजुवेंद्र सिंह मैहला ने कहा कि इस प्रकार के साहित्यिक कार्यक्रम समाज में आपसी भाईचारे की चेतना को जगाने का कार्य करते हैं, विशिष्ट अतिथि डॉ. पारूल मैहला ने कहा युवा पीढ़ी में अच्छे संस्कार साहित्य के माध्यम से ही आ सकते, कार्यक्रम में पहुंचे अंतराष्ट्रीय युवा शायर तनवीर फिरोजाबादी ने कहा क्यों पूछते हो आप मेरा कैसा हाल है,मर मर के जी रहा हूं ये मेरा कमाल है, संस्था अध्यक्ष व कार्यक्रम संयोजिका कवयित्री पूनम गोयल ने कहा प्यास अधरों की हो तो संभल जायेगी, प्यास नैनों की बुझना बड़ी बात है,कवि दलीप खरेरा ने कहा नाम तुम्हारे लिखी वसीयत,अमानत तुम्हारी तुम्हीं संभालो,पितृ ऋण से मुक्त करा कर, तुम बस पुत्र धर्म निभालो, शायर इक़बाल पानीपती ने कहा दे उन्हें दो चार हल्के से थपेड़े मुफ़लिसी,जो मेरी फ़ाका कशी पर मुस्कराए रात भर, संस्था संस्थापक रामेश्वर देव ने कहा हैरान हूं संसार का ये हाल देख कर,बदली हुई इंसान की मैं चाल देख कर, कवि डॉ.आर बी कपूर ने कहा कल तंग आकर मैंने घर की क्यारी में अहसास बो दिये, कमबख्त मिलते नहीं थे जब लिखने बैठता था,कवि प्रेम पाल सागर ने कहा बुझाती हैं मशालें क्यों अभी तो रात बाकी है, सम्भल के चलना कांटों के अभी जंग लात बाकी है, कवि गुरमुख सिंह वड़ैच ने कहा चन्द लम्हे हैं चलो हंस कर बिता लें,जाने कल जिन्दगी का क्या फैसला होगा, शायर हरबंस पथिक ने कहा जंग का ऐलान कर दिया, मौत का सामान कर दिया,शायरा सुमन मुस्कान ने कहा है तुम्हें किस बात का इतना गुमां अ आसमां, हमने तबीयत से अभी पत्थर उछाला है कहां,कवि नरेश लाभ ने कहा जल संरक्षित कीजिए,यही सभी की आस ,जीव जगत की बुझ सके,आकुल प्याकुल प्यास, कवयित्री सुषमा चौपड़ा ने कहा गुलाब हूं मैं बस इश्क जानता हूं, कांटों में भी खिल-खिलाना जानता हूं,शायरा नूर शम्श इलाहाबादी ने कहा प्यार क्या जताएं हम , नफरतों के घेरे हैं,आबरू बचे कैसे,घर में ही लुटेरे हैं, कवयित्री रोजलीन ने कहा बादलों की उड़ान कश्ती पर,तुम बैठकर आते हो मेरे पास, कवयित्री डॉ हर्ष सेठी ने कहा धूप भी है छांव भी है,राह में बदलाव भी है, कवयित्री अनुजा कपूर ने कहा कभी आंसू कभी सजदे,कभी हाथों का उठ जाना, इंसान जब टूट जाता है,तो रब बहुत याद आता है,शायर अशोक मलंग ने कहा किस पर करें यकीन जमाने में आजकल, ईमान है न दीन, जमाने में आजकल,कवि सिमरनजीत सिंह ने कहा आखाँ विच सारा जहान सांभी,बिन बोले ही सब कुछ केहंदी हैं, कार्यक्रम में राजपाल राजन,रमेश कुमार ने भी रचनाएं प्रस्तुत की।
इस अवसर पर संस्था की ओर से कार्यक्रम अध्यक्ष, मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि को बुक्के ,स्मृति चिह्न व शाल भेंट कर सम्मानित किया गया। उपस्थित सभी ने संस्था संरक्षक वरिष्ठ शायर डॉ. एस के शर्मा के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की,कार्यक्रम में गोपाल दास, नीना अग्रवाल, ईश्वर सिंह, शीला रानी,संजीव कुमार, नवीन कुमार, कमल कुमार,देव सहित श्रोताओं ने कविताओं व ग़ज़लों का लुप्त उठाया।




