हाईकोर्ट के आदेशों को ठेंगा दिखाकर पार्क की जमीन पर भूमाफियाओं को थमा दिया अवैध बिजली कनेक्शन
— केस्को की खुली मनमानी
– ऊर्जा मंत्री और केस्को एमडी को भेजे गए पत्र में हुआ बड़ा खुलासा, क्षेत्रीय पार्षद की तथाकथित ‘एनओसी’ की आड़ में रची जा रही है भ्रष्टाचार की साजिश।
— पार्क बचाओ समिति के अध्यक्ष ने उठाये तीखे सवाल, दोषी अधिकारियों पर उच्च स्तरीय सतर्कता जांच की मांग।
कानपुर नगर, शहर में सरकारी और सार्वजनिक संपत्तियों को बचाने के लिए चल रहे प्रयासों के बीच कानपुर विद्युत आपूर्ति कंपनी के अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गोविंद नगर ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क के मामले में केस्को के जिम्मेदार अधिकारियों ने कानून, शासन के नियमों और माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों को ताक पर रखकर भूमाफियाओं और अतिक्रमणकारियों को प्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुँचाना शुरू कर दिया है। इस संबंध में पार्क बचाओ समिति के अध्यक्ष प्रकाश वीर आर्य ने उत्तर प्रदेश शासन के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा तथा केस्को के प्रबंध निदेशक को एक विस्तृत और गंभीर पत्र प्रेषित कर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रिट याचिका संख्या पीआइएल 1023/ 2026 में 22 अप्रैल 2026 को आदेशित किया था कि गोविंद नगर ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क को पूरी तरह अतिक्रमणमुक्त कर उसके मूल हरित स्वरूप में बहाल किया जाए। इस कानूनी आदेश की विधिवत प्रति 12 मई 2026 को केस्को के प्रबंध निदेशक को व्यक्तिगत रूप से रिसीव कराई जा चुकी थी, ताकि विभाग को इसकी पूरी जानकारी हो।
उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश और विभाग को पूर्व में दी गई लिखित चेतावनियों के बावजूद, केस्को के सहायक अभियंता जय प्रकाश और अन्य अधिकारियों ने कथित मिलीभगत के चलते 06 जून 2026 को उक्त विवादित स्थल पर शिवांग गुप्ता के नाम से नया विद्युत संयोजन मीटर संख्या: G9672674, खाता संख्या: 7275-155-436 स्थापित करवा दिया।
केस्को की हास्यास्पद जांच आख्या और ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ वाली तर्ज,इस पूरे प्रकरण में दिनांक 04 अगस्त 2026 को केस्को के सहायक अभियंता द्वारा जारी की गई जांच आख्या संदर्भ संख्या: 40016426079156 ने विभाग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।
जांच रिपोर्ट में यह खुलासे रूप से स्वीकार किया गया है कि विवादित स्थल पर मंदिर होने का हवाला देकर क्षेत्रीय पार्षद सरोज चड्ढा द्वारा दी गई ‘एनओसी’ एनओसी के आधार पर यह बिजली कनेक्शन जारी किया गया है। जबकि नियमों के अनुसार सार्वजनिक पार्कों और संपत्तियों के रखरखाव, संरक्षण या स्वामित्व का अधिकार केवल नगर निगम और कानपुर विकास प्राधिकरण के गजटेड अधिकारियों के पास होता है, न कि किसी स्थानीय पार्षद के पास। जांच रिपोर्ट में हद तो तब पार हो गई जब केस्को अधिकारियों ने यह अजीबोगरीब शर्त रख दी कि “शिकायतकर्ता द्वारा मालिकाना हक से संबंधित प्रपत्र प्रेषित किए जाने के उपरांत ही स्थायी विच्छेदन की कार्यवाही की जाएगी।” अध्यक्ष ने सवाल उठाया है कि जब बिजली का नया संयोजन शिवांग गुप्ता के नाम पर जारी हुआ है, तो विभाग अवैध कब्जाधारियों से दस्तावेज मांगने के बजाय उल्टा शिकायतकर्ता से कागज क्यों मांग रहा है। क्या केस्को अब भूमाफियाओं का बचाव करने वाला विधिक सलाहकार बन गया है।
पार्क बचाओ समिति के अध्यक्ष ने ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा को शनिवार को भेजे गए अपने पत्र के माध्यम से मांग की है कि इस अत्यंत गंभीर प्रकरण का स्वतः संज्ञान लिया जाए। साथ ही, केस्को के दोषी सहायक अभियंता जय प्रकाश व अन्य संलिप्त कर्मियों के विरुद्ध उच्च स्तरीय विभागीय एवं सतर्कता जांच बैठाकर व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाए, तथा पार्षद की इस गैरकानूनी ‘एनओसी’ के आधार पर दिए गए अवैध विद्युत संयोजन को तत्काल प्रभाव से विच्छेदित (निरस्त) किया जाए।




