*एसडीएम के फर्जी हस्ताक्षर से भूमि उपयोग परिवर्तन का खेल उजागर, पेशकार निलंबित, मुकदमा दर्ज*
*डिस्ट्रिक हेड राहुल द्विवेदी*
कानपुर (उत्तर प्रदेश)। नर्वल तहसील में एसडीएम के फर्जी हस्ताक्षर कर भूमि उपयोग परिवर्तन का आदेश जारी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। न्यायालय द्वारा खारिज किए जा चुके एक प्रकरण में जमीन को कृषि से औद्योगिक घोषित करने का फर्जी आदेश तैयार कर उसे खतौनी में फीडिंग के लिए भी भेज दिया गया। मामले का खुलासा होने पर तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार, नर्वल तहसील के भूलेख प्रभारी राकेश तिवारी की ओर से नर्वल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। शिकायत में बताया गया कि कंप्यूटर ऑपरेटर रोहित भदौरिया ने फीडिंग के लिए आए एक आदेश को संदिग्ध पाया। इसके बाद तहसीलदार द्वारा कराई गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
जांच में पता चला कि बिरहर गांव स्थित 0.41 हेक्टेयर भूमि के उपयोग परिवर्तन का आवेदन आवश्यक शपथपत्र, सहमति पत्र एवं अन्य दस्तावेज प्रस्तुत न किए जाने के कारण न्यायालय पहले ही निरस्त कर चुका था। इसके बावजूद उसी प्रकरण में भूमि को कृषि से अकृषक एवं औद्योगिक उपयोग के लिए घोषित करने का आदेश जारी कर दिया गया।
मामले की जांच एसडीएम नर्वल, विवेक कुमार मिश्रा ने स्वयं की। जांच के दौरान पाया गया कि आदेश पर किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं थे, बल्कि उनके हस्ताक्षरों को स्कैन कर दस्तावेज में लगाया गया था। साथ ही आदेश का प्रारूप भी न्यायालय के अन्य आदेशों से अलग पाया गया। आरसीसीएमएस पोर्टल की जांच में संबंधित प्रकरण के पहले ही निरस्त होने की पुष्टि हुई।
जांच में तहसील के पेशकार अनुज त्रिपाठी की संलिप्तता सामने आने पर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद एसडीएम की रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने अनुज त्रिपाठी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने तथा उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए।
नर्वल थाना प्रभारी अनिल सिंह तोमर ने बताया कि मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और आरोपों की गहन जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।




