*परमट स्कूल विवाद: स्कूल बनने तक चप्पल नहीं पहनेंगे विधायक अमिताभ बाजपेई, नजरबंदी के बीच लिया संकल्प*
*डिस्ट्रिक हेड राहुल द्विवेदी*
कानपुर के परमट क्षेत्र में प्रस्तावित स्कूल निर्माण को लेकर सियासी संग्राम और तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के विधायक Amitabh Bajpai ने स्कूल निर्माण की मांग को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए संकल्प लिया है कि जब तक परमट में स्कूल का निर्माण शुरू नहीं हो जाता, तब तक वह चप्पल नहीं पहनेंगे और किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे।
विधायक को शुक्रवार को पुलिस ने उनके आवास पर नजरबंद कर दिया। इसके बावजूद उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीति की नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य की है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में वर्षों से स्कूल की जरूरत महसूस की जा रही है, लेकिन सरकार और प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीर नहीं हैं।
अमिताभ बाजपेई ने कहा कि परमट इलाके में हजारों परिवार रहते हैं, लेकिन बच्चों के लिए पर्याप्त सरकारी स्कूल नहीं है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को दूर-दराज के स्कूलों में पढ़ने जाना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्रीय जनता लंबे समय से स्कूल निर्माण की मांग कर रही है, लेकिन बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ।
विधायक ने अपने संकल्प की घोषणा करते हुए कहा, “जब तक स्कूल की नींव नहीं पड़ती, मैं चप्पल नहीं पहनूंगा। यह मेरे क्षेत्र की जनता और बच्चों के भविष्य के लिए मेरा प्रण है।” उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर लगातार संघर्ष करेंगे, चाहे उन्हें नजरबंद ही क्यों न किया जाए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद परमट इलाके का माहौल राजनीतिक रूप से गर्म हो गया। सपा कार्यकर्ताओं ने विधायक के समर्थन में प्रदर्शन किया और प्रशासन पर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया। कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि जनता की आवाज उठाने वाले जनप्रतिनिधि को घर में रोकना उचित नहीं है।
दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन कदम उठाए गए हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शिलान्यास और विरोध प्रदर्शन को लेकर तनाव की स्थिति बन सकती थी, इसलिए विधायक को अस्थायी रूप से घर पर ही रहने के निर्देश दिए गए।
परमट स्कूल को लेकर पहले भी भाजपा और सपा नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हो चुकी है। हाल ही में शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान दोनों दलों के समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की और विवाद की स्थिति भी सामने आई थी। उसी विवाद के बाद अब यह मामला पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन इलाके में स्कूल बनना बेहद जरूरी है। अभिभावकों का कहना है कि यदि सरकारी स्कूल बनता है तो गरीब परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर मिलेगा।
अब सबकी नजर प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी है। विधायक अमिताभ बाजपेई के संकल्प ने इस मुद्दे को और अधिक चर्चित बना दिया है। आने वाले दिनों में यह विवाद कानपुर की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।




