पनकी में कूड़े की आग उगल रही ज़हर, 50 हजार लोगों का सांस लेना भी दूभर
डिस्ट्रिक हेड: राहुल द्विवेदी
कानपुर के पनकी स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट अब आसपास के गांवों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। प्लांट में मशीनें खराब होने से जैविक खाद बनाने का काम लगभग ठप पड़ गया है, जिससे 46 एकड़ क्षेत्र में कूड़े के पहाड़ खड़े हो गए हैं। कूड़े में लगने वाली आग और उससे उठने वाले जहरीले धुएं के कारण करीब 50 हजार लोगों का सांस लेना भी दूभर हो गया है।
मशीनें बंद, कूड़े के पहाड़ खड़े
पनकी के ग्राम भऊ सिंह में बाईपास से पांडु नदी तक फैले इस प्लांट में रोज करीब 1400 मीट्रिक टन कूड़ा पहुंचता है। यहां गीले और सूखे कूड़े को अलग करने और गीले कूड़े से जैविक खाद बनाने के लिए 13 ट्रॉमल मशीनें लगाई गई हैं।
लेकिन इनमें से सात मशीनें खराब पड़ी हैं, जबकि बाकी मशीनें भी कूड़े के ढेरों के बीच धूल खा रही हैं। गुरुवार को निरीक्षण के दौरान सिर्फ दो ट्रॉमल मशीनें ही चलती हुई मिलीं।
खाद बनने के बजाय जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से कूड़े को इधर-उधर करके कूड़े के पहाड़ ऊंचे किए जा रहे हैं।
गर्मी बढ़ते ही कूड़े में लग रही आग
प्लांट में वर्षों से डंप लाखों मीट्रिक टन कूड़े में गर्मी बढ़ते ही स्वतः आग लगने की घटनाएं शुरू हो जाती हैं। करीब 20 दिन पहले भी कूड़े में आग लगी थी, जिसका धुआं कई दिनों तक आसपास के इलाकों में फैलता रहा।
इसके कारण जमुई, बदुआपुर, कला का पुरवा, पनका, पनका बहादुरनगर, पनकी पड़ाव, सुंदरनगर, गंगागंज, रतनपुर और भौंती जैसे क्षेत्रों में लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।
गांवों में बदबू के साथ-साथ मक्खियों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ गया है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
ग्रामीणों की पीड़ा
बदुआपुर की रहने वाली मंजू देवी कहती हैं कि गर्मी शुरू होते ही कूड़े में आग लगने लगती है। धुएं की वजह से घर के अंदर रहना भी मुश्किल हो जाता है।
वहीं रामकली का कहना है कि कई सालों से यह समस्या बनी हुई है और जहरीले धुएं के कारण लोगों की जिंदगी नारकीय हो गई है।
जहरीली गैसों से स्वास्थ्य पर खतरा
एचबीटीयू के बॉयोकेमेस्ट्री विभाग के डॉ. श्रवण के अनुसार पुराने कूड़े में मीथेन गैस बनने लगती है। तापमान बढ़ने पर इसकी सांद्रता बढ़ने से चिंगारियां उठती हैं और कूड़े में आग लग जाती है।
इस धुएं में मीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बन डाईऑक्साइड जैसी गैसें होती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. जे.एस. कुशवाहा के अनुसार कूड़े के जलने से निकलने वाले टॉक्सिंस से
सांस लेने में दिक्कत
सिरदर्द और मिचली
अस्थमा और ब्रोंकाइटिस
हृदय रोग
कैंसर का खतरा
महिलाओं में बांझपन और पुरुषों में कमजोरी
जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।




