मायावती ने पुरे बहुजन समाज से हाथ जोड़कर कहा कि समाज ऐसे दोगले आदमी के झांसे में न आए जिस तरह दिल्ली के उत्तम नगर में मामूली बात पर मुस्लिम समुदाय द्वारा दलित युवक व मां बाप की एकलौती संतान को बड़ी बेहरमी से 5 दिन पहले मौत के घाट उतार दिया लेकिन अभी तक दलितों के मसीहा नगीना सांसद चंद्रशेखर रावण की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है क्योंकि मरने वाला दलित हिंदू था और मारने वाला जिहादी कौम के 50 से 60 पुरुष व महिला थी। वही अगर मारने वाला हिंदू समाज से होता तों रावण और उसकी सेना पुरे दिल्ली को जाम कर देते क्या यही हैं इस दोगले आदमी कि पहचान एक दलित परिवार का बेटा मारा जाता हैं और दलित मसीहा ही उसकी स्पोर्ट में नहीं आ रहा है तो ऐसे दलित मसीहा जा बहिष्कार क्यों नहीं किया जाता है तरुण खटीक परिवार की तरफ से केवल सवर्ण समाज खड़ा है रावण नजर भी नहीं आ रहा है। क्या रावण केवल सवर्ण समाज को ही टारगेट करता है! इस पर अपनी राय अवश्य दे।




