कानपुर: 998 करोड़ के एलिवेटेड रोड पर छिड़ा ‘श्रेय’ का संग्राम, गडकरी की पोस्ट से तेज हुई सियासी रेस
डिस्ट्रिक हेड। राहुल द्विवेदी
कानपुर में वर्षों से जाम की मार झेल रही जनता को बड़ी राहत देने वाली रामादेवी–गोल चौराहा एलिवेटेड रोड परियोजना अब सियासी ‘श्रेय संग्राम’ का केंद्र बन गई है। 998.30 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने की जानकारी जैसे ही सार्वजनिक हुई, वैसे ही शहर के जनप्रतिनिधियों के बीच इसे अपने-अपने प्रयासों का नतीजा बताने की होड़ मच गई। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की सोशल मीडिया पोस्ट ने इस राजनीतिक रेस को और हवा दे दी।
मंजूरी मिलते ही बयानबाज़ी तेज
एलिवेटेड रोड की स्वीकृति की खबर सामने आने के बाद सांसद रमेश अवस्थी, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, अकबरपुर से सांसद देवेंद्र सिंह भोले और बिठूर विधायक अभिजीत सिंह सांगा सहित कई नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर बयान जारी किए। हर नेता ने दावा किया कि परियोजना को मंजूरी दिलाने में उसकी प्रमुख भूमिका रही है।
सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि सांसद बनने के बाद 12 दिसंबर 2024 को उन्होंने स्वयं मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर रामादेवी से गोल चौराहा तक एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण का आग्रह किया था। उन्होंने इसे कानपुर के लिए “ट्रैफिक की समस्या का स्थायी समाधान” बताया।
वहीं विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी कहा कि वे इस परियोजना को लेकर कई बार केंद्रीय मंत्री से मिल चुके हैं और लगातार कानपुर की यातायात समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते रहे हैं। उनका दावा है कि शहर के विकास के लिए यह परियोजना बेहद जरूरी थी।
दूसरी ओर, अकबरपुर सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने भी बयान जारी कर कहा कि एलिवेटेड रोड बनने से शहर को जाम से स्थायी मुक्ति मिलेगी और उन्होंने भी इसके लिए केंद्र सरकार से निरंतर संपर्क बनाए रखा था। देर रात बिठूर विधायक अभिजीत सिंह सांगा की ओर से सोशल मीडिया पर ‘बदनामपुर नहीं कानपुर’ शीर्षक से पोस्टर जारी कर बजट स्वीकृति का स्वागत किया गया।
सोशल मीडिया पर समर्थकों की जंग
मंत्री गडकरी की ओर से एक्स (पूर्व ट्विटर) पर परियोजना की जानकारी साझा किए जाने के बाद नेताओं के समर्थकों में सोशल मीडिया पर मानो बाढ़ आ गई। कोई इसे अपने सांसद की जीत बता रहा है तो कोई विधानसभा अध्यक्ष या क्षेत्रीय विधायक के प्रयासों का परिणाम। पोस्ट, पोस्टर और बयानों के जरिए ‘श्रेय’ लेने की यह जंग लगातार तेज होती जा रही है।
2012 से लटका था सपना
हालांकि हकीकत यह है कि रामादेवी–गोल चौराहा एलिवेटेड रोड की योजना कोई नई नहीं है। उच्च स्तरीय संयुक्त विकास समिति के समन्वयक नीरज श्रीवास्तव के अनुसार, वर्ष 2012 में तत्कालीन आयुक्त पी.के. महंती के कार्यकाल में लखनऊ के क्षेत्रीय अधिकारी अश्विनी कुमार ने अपनी तकनीकी टीम के साथ रूट का परीक्षण कर प्रस्ताव तैयार किया था। उस समय लागत अधिक होने के कारण वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल सकी।
इसके बाद जीटी रोड को छह लेन करने की योजना पर विचार हुआ, लेकिन गोल चौराहे से मेट्रो गुजरने के कारण वह प्रस्ताव भी अटक गया। वर्षों तक फाइलें चलती रहीं, डीपीआर में करीब 20 बार संशोधन किए गए। करीब दो महीने पहले अंतिम डीपीआर सबमिट की गई, जिसके बाद अब जाकर केंद्र सरकार से 998.30 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल पाई है।
एक घंटे का सफर, 20 मिनट में
एलिवेटेड रोड परियोजना को शहर के लिए ‘गेम चेंजर’ माना जा रहा है। फिलहाल सेंट्रल स्टेशन या एयरपोर्ट पहुंचने में लोगों को एक से दो घंटे तक जाम में फंसना पड़ता है। एलिवेटेड रोड बनने के बाद यह दूरी महज 20 से 30 मिनट में तय हो सकेगी। इससे न सिर्फ आम नागरिकों को राहत मिलेगी, बल्कि व्यापार और उद्योग को भी रफ्तार मिलेगी।
घनी आबादी वाले थोक बाजार—कपड़ा, सराफा और लोहा मंडी—से निकलकर वाहन घंटाघर होते हुए सीधे एलिवेटेड रोड पर पहुंच सकेंगे। यहां से लखनऊ, प्रयागराज और इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग तक निर्बाध आवागमन संभव होगा। जीटी रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है।
एयरपोर्ट और फ्लाइट संचालन को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि एलिवेटेड रोड से कानपुर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। यात्रियों की संख्या बढ़ने पर सरकार पर फ्लाइट संचालन बढ़ाने का दबाव भी बनेगा। यह परियोजना न सिर्फ यातायात, बल्कि शहर की आर्थिक गतिविधियों को भी नई उड़ान देगी।
जनता को राहत, राजनीति अपनी जगह
भले ही नेता श्रेय लेने की होड़ में हों, लेकिन आम जनता के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि वर्षों से जाम में फंसी कानपुर की रफ्तार अब तेज होने वाली है। एलिवेटेड रोड परियोजना के धरातल पर उतरते ही शहर को विकास की नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।




