कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों में गरीबों की ढाल बनी यूपी सरकार की योजना
बिना आयुष्मान कार्ड भी मिलेगा मुफ्त इलाज, गंभीर बीमारी सहायता योजना बनी संजीवनी
डिस्ट्रिक हेड। राहुल द्विवेदी
लखनऊ | कैंसर—एक ऐसी बीमारी, जिसका नाम सुनते ही इंसान अंदर तक सिहर उठता है। बीमारी से लड़ाई जितनी कठिन होती है, उससे कहीं ज्यादा भारी होता है इसका इलाज। लाखों रुपये का खर्च कई बार पूरे परिवार को कर्ज और बेबसी में धकेल देता है। ऐसे समय में उत्तर प्रदेश सरकार की ‘निर्माण कामगार गंभीर बीमारी सहायता योजना’ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए जीवन रक्षक साबित हो रही है।
बिना आयुष्मान कार्ड भी मिलेगा इलाज
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इलाज के लिए आयुष्मान भारत कार्ड या आयुष्मान वय वंदना कार्ड अनिवार्य नहीं है। यानी जिन श्रमिकों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, वे भी इस योजना के तहत गंभीर बीमारियों का इलाज करा सकते हैं।
इलाज की कोई अधिकतम सीमा नहीं
जहां अधिकतर स्वास्थ्य योजनाओं में इलाज खर्च की एक सीमा तय होती है, वहीं इस योजना में इलाज पर खर्च की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की गई है। इससे कैंसर जैसी महंगी और लंबी बीमारी में मरीज और उसके परिवार को आर्थिक चिंता से बड़ी राहत मिलती है।
कैंसर समेत 13 गंभीर बीमारियां शामिल
‘निर्माण कामगार गंभीर बीमारी सहायता योजना’ के तहत न केवल आयुष्मान भारत योजना में शामिल बीमारियों का इलाज संभव है, बल्कि इसके अलावा कैंसर सहित 13 अन्य गंभीर बीमारियों को भी कवर किया गया है।
निर्माण श्रमिकों के लिए जीवनदायिनी पहल
यह योजना विशेष रूप से पंजीकृत निर्माण कामगार श्रमिकों के लिए लागू की गई है। सीमित आय और अस्थिर रोजगार के कारण जो श्रमिक पहले इलाज से वंचित रह जाते थे, उनके लिए यह योजना नई उम्मीद बनकर उभरी है।
इलाज ही नहीं, उम्मीद भी दे रही योजना
सरकार की यह पहल केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन बचाने की मजबूत गारंटी भी देती है। विश्व कैंसर दिवस के मौके पर यह योजना एक बार फिर यह साबित करती है कि सरकार गंभीर बीमारियों से जूझ रहे गरीबों के साथ खड़ी है।




